राजगांगपुर में स्थित एक बिमार अस्पताल 

राजगांगपुर में स्थित एक बिमार अस्पताल 

रामप्रवेश चौधरी (संपादक) 

सुंदरगढ़ जिला के राजगांगपुर शहर में स्थित सरकारी अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है। स्थानीय जनता द्वारा  इस पर असंतोष व्यक्त किया गया है। 6 साल पहले तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री प्रताप जेना ने इसका उद्घाटन किया था, तब भी राजगांगपुर स्वास्थ्य केंद्र में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं थे। इस अस्पताल में उद्घाटन के कुछ साल बाद एक चिकित्सक आया भी तो महज एक साल के लिए। 

पिछले साल डीएमएफ फंड से एक डॉक्टर की नियुक्ति की गई थी, डाक्टर के समय पर अस्पताल नहीं आने के कारण उनका यहां से तबादला कर दिया गया।  तब से इस अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ का पद रिक्त पड़ा हुआ है।  
इस बात से जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिला कलेक्टर, विधायक,एवं विभागीय मंत्री सहित विभिन्न स्तरों पर अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अबतक इसका कोई हल नही निकाल पाया है, फलस्वरूप  जन्म के बाद शिशु की चिकित्सा हेतु ,शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं होने से माताओं को अनेकों तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
एक तरफ सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में  विभिन्न योजनाओं के तहत बड़ी - बड़ी इमारतों का निर्माण करवा रही है, तो दूसरी तरफ इन इमारतो में चलने वाले सरकारी अस्पताल में कई आभाव बने हुए हैं। 

इसका ताजा उदाहरण उल्लिखित राजगांगपुर सरकारी अस्पताल में देखने को मिल रहा है। इस अस्पताल में प्रतिदिन 300 से अधिक मरीजों, (बाह्य रोग विभाग) की स्वास्थ्य जांच आमतौर पर दो डॉक्टरों पर निर्भर करती है।  विशेषज्ञ चिकित्सक इस अस्पताल में नही है, जिससे मरिजो को अनेक तरह के समस्याओं से निपटना पड़ता है।

 संक्षेप में कहा जाये तो इसे एक रेफरल अस्पताल के रूप में जाना जाता है।लाखों की आबादी को अपने आगोश में समेट औद्योगिक शहर राजगांगपुर आज अस्वस्थ है।

अस्पताल में लंबे समय से डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। यहाँ कोई भी विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। कई वर्षों के बाद डीएमएफ से सेवानिवृत्त एक हड्डी रोग(विशेषज्ञ) की नियुक्ति से राजगांगपुर के लोगों को लाभ हो रहा है।  वहीं, हड्डी रोग विशेषज्ञ के साथ-साथ शिशु रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति से शहरवासियों को लाभ मिल सकता था.  जिला स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से इस पहलू पर गौर करने की मांग की जा रही है।